सुप्रभात

dskhoja(27)
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सोचने से कहा मिलते है ,
तमन्ना के शहर,
चलने की ज़िद भी ज़रूरी है ,
मंज़िलो के लिए...!!!

ज़रूर कुछ तो बनाएगी ज़िंदगी मुझको ,
क़दम क़दम पर मेरा इम्तिहान लेती है ।।

हमारी समस्या का समाधान केवल हमारे पास है ,
दूसरो के पास सिर्फ़ सुझाव है ।।।।

🍁🍁🍁 सुप्रभात 🍁🍁🍁

सुप्रभात | Ecency