बड़ी आसानी से निकाल देते है लोग दूसरों में ऐब..
जैसे उनका दील नेकियो का नवाब है...
अपने ग़लत कर्मों पर सौ पर्दे डाल के हर कोई कह देता है...
ज़माना बड़ा ख़राब है...
दबे होंठों को बनाया है सहारा अपना ,
सुना है कम बोलने से बहुत मसले सुलझ जाते है ।।
इबादत वो है जिसमें ज़रूरतों का ज़िक्र ना हो ,
हो तो बस एक सिर्फ़ उसकी रहमतो का शुक्र हो.
🍁🍁🍁 सुप्रभात 🍁🍁🍁