मुर्ख लोगो से कभी विवाद न करे :
चाणक्य कहते है कि हमें कभी भी मुर्ख लोगो के साथ विवाद नहीं करना चाहिए. मुर्ख लोगो के पास बिलकुल भी समझदारी नहीं होती अगर आप उनसे विवाद करेंगे तो नुकसान आपका ही होगा. ऐसे लोगो के साथ बहस होने पर आपकी इज्जत कम हो जाएगी. ऐसे लोग आपको मानसिक तौर पर कमजोर कर सकते है. मुर्ख लोगो से विवाद से बचना हो तो चुप रहे और अपने विवेक से काम ले. इसलिए कभी भी मुर्ख लोगो से विवाद न करे.
अपनी कमजोरी किसी को न बताये :
अधिकांश लोग अपने चहेतो को, अपने नजदीकी रिश्तो में अपनी कमजोरियां उजागर कर देते है जो उन्हें बाद में बड़ी महंगी पड़ जाती है. जब आपका जन्म होता है तब आप सिर्फ अकेले होते है. पैदा होते ही आपके सांसारिक रिश्ते शुरू हो जाते है. समय के साथ आप कई गहरे रिश्ते में बध जाते हो. ऐसे में हम अपनी कमजोरी अपने इन रिश्तो में बता देते है.
जो बाद में अन्य लोगो को भी पता चल जाती है. जो हमारे निजी जीवन के लिए ठीक नहीं होता. हर व्यक्ति की कोई न कोई कमजोरी जरुर होती है. ऐसे में कभी भी अपनी कमजोरी किसी को भी न बताये. चाहे वह आपका दोस्त या आपकी पत्नी ही क्यों न हो. अपनी आत्मा के सम्मान के लिए इससे बचे.
आपका एक दोष आपके सभी गुणों को नष्ट कर सकता है :
जीवन में ऐसे बहुत से उदाहरण देखने को मिलते है जब लोगो के पास सुख – सुविधा, धन – वैभव होने के बावजूद भी वे कोई ऐसी गलती कर देते है जिनसे उनका स्वर्ग जैसा जीवन नरक बन जाता है. यह किस कारण होता है – हमारे एक दोष के कारण. भले ही आपमें बहुत से गुण हो. आपका व्यवहार अच्छा हो, आप दयावान हो, आप समाजसेवी हो या आप पैसे वाले हो.
आपकी समाज में बड़ी इज्जत है. लेकिन अगर आपके अंदर एक छोटा सा भी दोष होगा तो वह आपका जीवन बर्बाद कर देगा. दोष जैसे – नशेबाजी करना, अय्याशी करना, घमंड करना या जुआ खेलना. इसलिए खुद में झाँक कर देखे की आपके अंदर कोई दोष तो नहीं है. अगर है तो उसे त्याग दे. वरना आपकी मेहनत से बनायीं गई सारी इज्जत एक पल में ही मिटटी में मिल जाएगी.
धन को सोच – समझ कर खर्च करे :
यह वाक्य आपने जरुर सुना होगा कि ”धन है तो जीवन है”बिना धन के तो हम सब कंगाल है. बात बिलकुल पते की है. बिना धन के न इज्जत है न ही सुख – समृद्धि. धन हमारे जीवन में खास रोल अदा करता है. कई ऐसे लोग होते है जो इस धन का बड़ा दुरूपयोग करते है. वे बड़ी Mehnat से खून – पसीना लगाकर पैसा कमाते है और फिर उस पैसो को धुंए की तरह उड़ा देते है. अधिकतर लोग ऐसे मैंने देखे है जो दिनभर मजदूरी करते है और शाम होते ही शराब पीकर उस कमाई को बर्बाद कर देते है.
बर्बाद ही करना है तो फिर मेहनत करने का फायदा क्या ?. अगर आपके पास अधिक पैसा भी हो तो उसे भी Limit के साथ खर्च करे. समय का कुछ पता नहीं कि कब पलट जाए. आचार्य चाणक्य की यह लाइन याद रखे ” कुबेर भी अपने आय से ज्यादा खर्च करेगा तो कंगाल हो जायेगा “. इसलिए धन कमाए उसकी बचत करे और जब जरुरत हो तभी खर्च करे.
बदनामी से डरे :
आचार्य चाणक्य कहते है कि ” अपमानित हो के जीने से मरना अच्छा है. मृत्यु तो बस एक क्षण का दुःख देती है, लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुःख लाता है ”. हम सभी के अंदर बदनामी का डर होना चाहिए. अगर यह डर खत्म हो गया तो दुनिया बदहाल हो जाएगी. Jeevan का सबसे बड़ा दुःख बदनाम होना होता है. यह आदमी को जीते जी हर पल मरवाती है.
यह होता तब है जब हमारी आत्मा भी हमसे कहती है कि आप गलत हो और आपने गलत किया. ज़िन्दगी में कोई ऐसा काम न करे जिससे आपको पूरी ज़िन्दगी बदनामी से जीनी पड़े. एक बार अगर आप बदनाम हो गये तो फिर वापस आप लोगो की नजरो में पहले जैसे नहीं रहोगे. इसलिए जीवन में कोई भी बड़ा Step लेने से पहले हजार बार जरुर सोचे.
आलस्य को त्याग दे :
इस दुनिया में बस 20% लोग ही ऐसे होते है जो सफलता की केटेगरी में आते है. पर दूनिया में लोग तो 100% है तो आखिर ये 80% लोग सफल क्यों नहीं होते ? अब आप कहोगे की इन्हें अच्छी परवरिश मिली होगी या इनके बाप – दादा अच्छे घर से होंगे. नहीं गलत, आज ऐसे कई Example है जहाँ लोगो ने जमीन से आसमान की बुलंदियां छुई है.
ऐसे लोग जो गरीब जीवन जीते हुए बहुत अमीर बन गये. इन सब में एक बड़ा diffrence है आलस्य का. 80% लोग किसी को करने में आलस्य करते है वही 20% लोग उसी काम को बड़ा मन लगाकर करते है. इसलिए जीवन बेहतर और खुशहाल बनाना है तो आलस्य त्यागो और परिश्रम करना सीखो. याद रखो ” आलसी मनुष्य का कोई भी वर्तमान और भविष्य नहीं होता.