देख दुनिया जलती थी,जब साथ उसे ले मैं चलता था; थी चपला सी चंचल वो ,दिल हर एक पिघलता था ; काया मुख हूर का पग-पग प्राण कुचलता था, पास मेरे होने से उसके, ये अम्बर अपना लगता था ; थी वो बला वह , जिसे देख चाँद निकलता था ।।
©i_ankit