Login
Discover
Waves
Communities
Raidstead
Write
Login
Signup
Vansh
@vansh82
62
All time busy
Followers
82
Following
45
Follow
Email digest
Resource Credits
Available
Used
Location
Moon
Created
2018-10-05 14:20
RSS Feed
Subscribe
Posts
Blog
Posts
Comments
Communities
Wallet
vansh82
bharat
8y
Nakara diwaan(नकटा दीवान)2
तब गुरुदेव ने कहा कि जब तक मनुष्य अपना नाक रखना। चाहता है तब तक प्रभू दर्शन नहीं देते हैं तब मैंने कहा कि नाक क्या प्राण भी मुझे देने क्यों नहीं पड़े मुझे तो प्रभु के दर्शन चाहिए । गुरुदेव के मेरी तरफ
$ 4.162
57
2
vansh82
bharat
8y
Nakara diwaan(नकटा दीवान)
एक राजा का दीवान बहुत धुत था। इसलिए राजाने उसका नाक काटकर देश के बाहर निकाल दिया था। दीवान ने सोचा कि साधुओ में जाने से सब अवगुण छिप जाते हैं। ऐसा सोच कर उसने साधु का रूप धारण कर लिया। जगह-जगह कथा कीर्तन
$ 4.256
60
2
vansh82
bharat
8y
danda panthee/4
तब उस अनुभवी सन्त ने कहा कि आप सब डण्डा क्यों पीट रहे हैं। तब महन्त ने कहा कि हम सब डण्डा पंथी है । भोजन के समय पिटे तो दुनियां के सब दण्डे मिटे । अनुभवी सन्त ने सोचा कि हो न हो उनके यहाँ कोई अन्धा साधू
vansh82
bharat
8y
danda panthee/3
भक्त ने कहा महाराज मैं आपको एक डण्डा दे देता हूँ। उस डण्डे को भोजन करते हुए इधर उधर घुमाओ जिससे बिल्ली को लगा जाएगा तो वह भाग जायेगी। सूरदास जीवन भर उसी तरह से डण्डा घुमाता रहा और गुजर गया। उसके बाद उसका
vansh82
bharat
8y
danda panthee/2
दूसरे दिन वह भट पूजा लेकर आ गया। अब सूरदास ने लगाई कि भगवान जल्दी आओ भोग लगाओ, मक्खन रोटी खाओ। लेकिन दूसरा आदमी बैठा था इसलिए बिल्ली नहीं आयी । तो सरदास बोला अरे भगवान जल्दी पधारो म्हारो काम सुधारो। '
vansh82
bharat
8y
danda panthee
एक मन्दिर में अन्धा साधू रहता था जो भिक्षा मांगकर अपना गुजारा चलाता था। भोजन के समय कहता हे भगवान लगाना भोग। एक दिन एक बिल्ली आ गयी और थाली में से रोटी लेकर भाग गयी। अन्धे साधू ने सोचा कि भगवान आ गये और
vansh82
bharat
8y
haakim oont bana/3
उस पर १८ मन पत्थर लाद दिये जिससे ऊँट से उठा नहीं गया, जिससे मजदूर उसे लाठी से मारने लगा। तब ऊँट बहुत दु:खी होकर अडाटा कर रहा था। संयोगवश गुरुजी पास जा रहे थे। उन्होंने ऊँट की आवाज सुनी उस खान के से तो
vansh82
bharat
8y
haakim oont bana/2
हाकिम समझ गया कि किसी ने मेरी शिकायत की है । हाकिम बोला गुरुदेव ऐसी तो कोई बात नहीं, हमको शासन चलाना पड़ता है। इसलिए डण्डे बिना शासन नहीं चल सकता है। , होर, पशु और नारी यह ताड़न के अधिकारी है फिर भी आपकी
vansh82
bharat
8y
haakim oont bana
महात्मा सगरामदासजी के पास एक हाकिम न गुरु भक्ति धारण की लेकिन हाकिम बिना भले बुरे को देखे ही जनता से बहुत दण्ड लेता और बहुत सताता था। तब गरीब किसान लोग गुरुदेव के पास आकर बोले कि गुरुदेव आपका चेला हाकिम
vansh82
bharat
8y
sant va pativrata/2
आप क्रोध न कर में वह चिड़िया नहीं हूं जो तुम जला सकते हो। यह शब्द सुनते ही तपस्वी ठण्डा पड़ गया और बोला कि बहिन तुम्हें मेरे मन की बात का पता कैसे चला। चिड़िया को तो मैने पहाड़ों में जलाई थी तुमने यहां
vansh82
bharat
8y
sant va pativrata
एक सन्त बारह वर्ष से पहाड़ों में तपस्या कर रहे थे । उनको ऐसी सिद्धि हुई कि टैंक से किसी को भी जला सकते हैं। सन्त ने सोचा कि अब दुनिया में चलो। मेरे सामने कोई सीधा नहीं रहेगा तो मैं भष्म कर देंगा। जिससे
vansh82
bharat
8y
sant lekh mita sakate hain/6
अब दोनों भाईयों ने बड़ी प्रसन्नता से खाने-पीने का अच्छा सामान जुटाया। कुछ समय बाद अच्छा बंगला खरीद भी लिया। एक महीने तक विधाता घोड़े व सोना ला-ला कर परेशान हो गयी । फिर एक समय रात को विधाता उस महात्मा
vansh82
bharat
8y
sant lekh mita sakate hain/5
आखिर झक मार कर विधाता को सोने का हिरण भेजना ही पड़ेगा। उस सोने के हिरण को मारकर घर ले आना। घोड़े वाले को कहा कि तुम सबेरा होते ही घोड़े बेच देना विधाता ने तेरे लिए घोड़े का लिखा है इसलिए झक मार कर उसे
vansh82
bharat
8y
sant lekh mita sakate hain/4
उनका उज्जवल भविष्य बनाना मेरा कर्तव्य है। गुरुजी शाम को झौंपड़ी पर गये । दोनों भाईयों ने देखा कि साधू यहां कैसे आया और कहा कि महाराज इधर कैसे आये हो ? महात्मा ने कहा तुम्हारे पिता यहां के राजा थे। वे मेरे
vansh82
bharat
8y
sant lekh mita sakate hain/3
राजा समझ गया कि बच्चे अच्छे मुहूर्त में नहीं हुए है। गुरुदेव का दूर जाना मेरा दुर्भाग्य है। महात्मा चले गये। इथर राजा का दुश्मन चढ़ाई करने आया जिससे राजा मारा गया और बच्चों को एक कुम्हार ले गया। दोनों
vansh82
bharat
8y
sant lekh mita sakate hain/2
महात्मा ने कहा देख तुम्हें पछताना न पड़े। विधाता ने कहा के आप अपनी करनी में कसर मत रखना। लेख को मिटाने वाला कोई पैदा नहीं हुआ। ऐसा कहकर विधाता चली गयी। महात्मा ने सोचा कि अब मुझे यहां नहीं रहना चाहिए।
vansh82
bharat
8y
sant lekh mita sakate hain
एक राजा के यहां सन्त रहते थे। राजा के दो जुड़वे पुत्र होने वाले थे, उसका लेख लिखने के लिए विधाता आयी । महत्मा ने दिव्य द्रष्टि द्वारा देखा और कहा कि तू कौन है और कहां जा रही है। उसने कहा कि मैं विधाता
vansh82
bharat
8y
Ravana's daughter/5
All Rajpurohit together with diamond-jewelery Crossed the king and sent the message to the king on behalf of Ravana Narrated Then the king was pleased and said that Lankeshwar sent you So we accept this
vansh82
bharat
8y
Ravana's daughter/4
Take the child and call the doctor and the good Treated in kind. Within a short time the boy got healthy. If that boy was sent to school, then in a very short time, Knowledge is learned by scholars Gaya
vansh82
bharat
8y
Ravana's daughter/3
But who are the ones who kept Ram Executioner Atmara says to the inside that do not kill him, locked in the basket Throw it into the river and he closed it in the basket. Shedding in The basil with the
← Latest
Older →