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puneetsuthar
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2017-10-02 18:25
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puneetsuthar
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Bhakt nabhaji
દત્તા નાઝી એક અંધ બાળકનો જન્મ ગરીબ પરિવારમાં થયો હતો. તેમના માતાપિતા ખૂબ ગરીબીને લીધે, બાળક જંગલ છોડ્યું. ત્યાં બાકી રડતા હતા, નજીક એક સંપ્રદાય આશ્રમ હતો, તે સંત તે લીધો સંતો તેમના સંત મહાપ્રસાદ, સંતોને
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puneetsuthar
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Bhakt droov/part3
અંતે ભગવાન હરિ પોતે દેખાયા અને ધ્રુવને કહ્યું! હું તમારો છું હું તપથી ખુશ છું-હું તમને ત્રિલૉકીનો નિયમ આપું છું બીજું કંઈક જોઈએ છે ધ્રુવની તપસ્યાના ચહેરામાં તેણે કહ્યું, "હે પ્રભુ, હવે મને શું બાકી
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puneetsuthar
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8y
Bhakt droov/part2
પછી રાજાએ તેને એક માણસ મોકલી આપ્યો જે તમે તેને કહ્યું હતું વૂડ્સમાં બહાર જશો નહીં, તમારા માટે સારો ખોરાક વાપરો. વિલંબ ધ્રુવ માનતા હતા કે ભક્તિ પણ શરૂ થઈ નથી અને સારી પણ નથી ખોરાક શરૂ થયો હતો અને જો તમે
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dharm
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Bhakt droov
એક ભવ્ય રાજાની બે રાણીઓ હતી, એક ચિંતિત અને બીજી તેણી અસંભવિત છે ધ્રુવના પુત્ર અશક્ય હતા. એકવાર બહાર નીકળો આવો, રાજા પાસે જાઓ, પછી રાજા પ્રેમાળ રીતે તેના ગોળાને ઢાંકશે તેને લીધો રાણી રાજા પાસે બેઠેલી હતી
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Kalu Kir/part2
हमारे यहां रहने से बन्दगी में खलल होने से खुदा नाराज हो जाएगा तो मेरी बादशाही खत्म हो जायेगी। सैनिकों से कहा यहाँ से आगे चलो । बादशाह ने कालू कीर को प्रणाम किया और दो सोने की मोहर चरणों में भेंट कर चला
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Kalu Kir
काल कीर ने किसी तालाब में सिगाड़ों की खेती की। तालाब के किनारे विशाल वटवृक्ष था। वह उसके नीचे एक झोंपड़ी बनाकर रहता था। एक दिन बादशाह की फौज आई। फौज के सैनिकों ने बट-वृक्ष के नीचे अपना डेरा लगाना शुरू
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Sooli se shool bani/2
वैश्या के यहां से आया उसको एक तोला सोना मिला। तब कुसंगी खुश होकर बोला कि देख मजे करने वाले व्यक्ति को और भी भगवान धन साधन देता है । तू सन्तों के यहां सेवा करके आया तेरे पैर में काँटा लगा, देख यह तेरे मेरे
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Sooli se shool bani
एक मोहल्ले से दो लड़के निकले । आपस में कहने लगे तू कहाँ जा रहा है। एक ने कहा कि मैं सन्तों की सत्संग में जा रहा हूं। दूसरे ने कहा, कि मैं वैश्या के यहां जा रहा हूं। सत्संगी कहता है कि अरे मेरे साथ चल,
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bhakti se shoolee talee/part2
'राजन् मैने न चोरी की है, न चोरों को चोरी करने का कहा है । मैने न तुम्हारे धन की तरफ देखा है बिना खोज किये ही मुझे निर्दोष को सूली पर चढ़ाते हो आपको भारी ब्रह्म हत्या का पाप लग जायेगा और भी बहुत से भक्त
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bhakti se shoolee talee
एक महात्मा एक वर्ष की समाधी धारण कर बैठे थे। रात को चार चोर आये और हाथ जोड़कर कहा कि हे महाराज आज हम राजा के यहां चोरी करने जा रहे है। अगर चोरी सही हो गई तो चोरी का चौथा हिस्सा हम आपको चढ़ा देगे। चोर गए
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gud khal ek hee bhaav/part4
यह सुनकर राजा ने कहा मैं बूढ़ा हो गया हूं। मुझे जाने दो। इन्द्रलोक का राज में करूगा। मेरे से बीस हजार रूपये ले लीजिये और मुझे वह अवसर दीजिये । सन्तों ने कहा कि जल्दी करो कोई और मर गया तो वह अवसर ले लेगाराजा
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gud khal ek hee bhaav/part3
फांसी के पहले पूछा तेरी कोई ईच्छा हो तो बता, उसने कहा मेरे गुरुजी के दर्शन करा दो । सिपाही उसे ले गये, गुरुजी को देखते ही वह रो पड़ा। गुरुजी ने कहा पूर्व मैने पहले ही कहा था जागते रहना कोई चीज मेरी मत
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gud khal ek hee bhaav/part2
गुरुजी ने कहा ‘‘जहां गुड़ खल एक ही भाव है उस गांव में नहीं रहना चलो आगे चलो, शिष्य ने कहा गुरुजी मैं तो थक गया हूं। यहाँ ही ठहसंगा। गुरुजी ने कहा तुम ठहरो मैं जाता , सुनो रात को जागते रहना और कोई पूछे
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gud khal ek hee bhaav
एक साधु अपने शिष्य सहित तीर्थ जा रहे थे, रास्ते में एक गांव आया वहाँ रात्रि विराम के लिए गांव के बाहर एक मन्दिर में ठहरे और शिष्यों को कहा भोजन के लिए अपने पास भिक्षा की रोटी है। एक रूपया ले जाओ और पचास
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devotion-brings-pleasure/part4
आज्ञानुसार सब तैयारी हो गयी व सभी हाथ जोड़कर बैठ गये। सब गुरुदेव की ओर देख रह थे। इतने में नारायणदास की आंख खुली और कहा ओह राजन् आप यहां और कैसे १ राजा ने कहा प्रभू वही शुभ दिन है जब गुरुदेव के दर्शन हों।
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devotion-brings-pleasure/part3
अपने सैनिकों से कहा कि पहाड़ के अन्दर पानी तलाश कर पानी लाओ, सैनिक पानी की तलाश में निकले और जहां पर नारायणदास सो रहे थे, वहां पहुंच गये । सैनिकों ने नारायणदास को देखा यह जान लिया कि ये हमारे राजा के गुरुदेव
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devotion-brings-pleasure/part2
रात को ग्यारह बजे रामदास अपने शिष्य नारायणदास के बंगले पर पहुंचे। नारायणदास ने गुरुदेव का देखकर दण्डवत् प्रणाम कर आगमन कहा कि हे गुरुदेव इस वक्त दास को दर्शन देने की कैसे कृपा की १ गुरुदेव ने कहा नारायण
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Devotion brings pleasure
समरथ रामदास एक दिन सतसंग कर रहे थे, उस समय कहा कि, हे सज्जनो सादा जीवन उच्च विचार रखो, आनन्द से जीवन बिताओ, अपनी जरूरतें कम करोथोड़े में अपना काम चलाओ, उससे सुखी रहोगे । जितनी जरूरतें बढ़ाओगे उतना ही दुःख
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Shivaji, the disciple of Ramdas/part4
उनको तो द्रढ़ विश्वास था कि जिस पर गुरुदेव का सच्चा पहरा हो, उसे काल भी नहीं खा सकता। तो ये शेरनी क्या चीज है । इतने में शेरनी आ पहुंची। शिवाजी ने हाथ जोड़कर कहा, हे मातेश्वरी मैं | अपने प्राणप्रिय गुरुदेव
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Shivaji, the disciple of Ramdas/part3
तो तुरन्त शिवाजी को मालूम हुआ कि गुरुदेव के पेट में भारी दर्द है वे आयेगुरुदेव को साष्टांग प्रणाम करके कहाप्रभू यह आपको क्या हो गया। आपके बिना हमारा जीवन सूना हो जायेगा हमारे तो प्राण आप ही है। आज्ञा कीजिए
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